प्रधान मंत्री ने 19 मार्च को राष्ट्र को संबोधन के साथ दूसरे शहरों में पलायित आमजनों को अपने घर जाने का भी निवेदन करना था।
आज जो दिल्ली में इतनी बड़ी मात्रा में लोग दिल्ली के बॉर्डर पर जमा है इसका जिम्मेदार केंद्र सरकार भी है और दिल्ली सरकार ही है। अगर यह लॉक डाउन करने के पहले इस बात पर मंथन किया जाता कि बड़े शहरों में दूसरे शहरों एवं राज्यों से कई लोग काम करने आए लोग मौजूद हैं , तो सबसे पहले उन्हें उनके घर जाने की सूचना देनी चाहिए जिससे कि वह लोग आसानी से अपने घर पहुंच जाते लॉक डाउन के बाद आवागमन के साधन बंद कर दिए गए जो जहां थे वही थम का राह गए।
लॉक डाउन की अवधि बढ़ती गई और यातायात थमता गया, परिणाम लोग राज्यो और शहरों की सीमा में फस गए,
ऐसे में फसे लोगो की तरफ किसी का भी ध्यान नही गया। लोगो के पास परिवार सहित खाने के लाले पड़ने लगे, जो लोग मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे थे अब वो किसी काम के नही बचे, परिणाम आज दिल्ली में आपके सामने है।
प्रधान सेवक के आवाहन पर देशभर ने घंटे घड़ियाल थाली ठोक कर जिस लाक डाउन से अभिवादन किया गया। परंतु दूसरे शहरों और राज्यों में फंसे लोगों पर किसी की नजर नहीं गई परिणाम स्वरूप फंसे हुए लोगों के पास अब यही विकल्प था कि वह यातायात साधनों के बिना ही अपने अपने घर की ओर निकल पड़े और पुलिस प्रशासन ने उन्हें सीमा बंदी के कारण जाने से रोका इसी बीच अफवाहों का दौर भी बहुत गर्म हो गया नतीजा यह निकला कि अब लोग दिल्ली से सटे सीमा पर एकत्रित हो गए हैं, और अपने घर जाने के लिए वाहनों की तलाश कर रहे हैं उनमें से कई लोगों ने तो पिछले तीन-चार दिनों से भोजन का दाना भी ग्रहण नहीं किया, ऐसी बदहवास स्थिति में जनसेवा को को दिल्ली सरकार को और केंद्र सरकार को ऐसे फंसे हुए लोगों के लिए स्वास्थ्य दवाइयां एवं भोजन का इंतजाम करना चाहिए अन्यथा जिस लाख डॉन को अभी तक हम सफल बता रहे थे वह एक भयानक स्थिति पहुंच जाएगा और देशों में धीरे धीरे मृत लाशों का अंबार खड़ा हो जाएगा। और किसी के ऊपर दोषारोपण करने का समय भी नही बचेगा, ऐसे बुरे वक्त में हम भी अपने सामने से निकलते लोगो की भोजन और जल के माध्यम से मदद कर सकते है।और ईश्वर से प्रार्थना कर सकते है। इतनी विविधता वाले देश मे इतनी जल्दी फैसला लेना कभी कभी सही नही होता।
आज जो दिल्ली में इतनी बड़ी मात्रा में लोग दिल्ली के बॉर्डर पर जमा है इसका जिम्मेदार केंद्र सरकार भी है और दिल्ली सरकार ही है। अगर यह लॉक डाउन करने के पहले इस बात पर मंथन किया जाता कि बड़े शहरों में दूसरे शहरों एवं राज्यों से कई लोग काम करने आए लोग मौजूद हैं , तो सबसे पहले उन्हें उनके घर जाने की सूचना देनी चाहिए जिससे कि वह लोग आसानी से अपने घर पहुंच जाते लॉक डाउन के बाद आवागमन के साधन बंद कर दिए गए जो जहां थे वही थम का राह गए।
लॉक डाउन की अवधि बढ़ती गई और यातायात थमता गया, परिणाम लोग राज्यो और शहरों की सीमा में फस गए,
ऐसे में फसे लोगो की तरफ किसी का भी ध्यान नही गया। लोगो के पास परिवार सहित खाने के लाले पड़ने लगे, जो लोग मजदूरी कर अपना पेट पाल रहे थे अब वो किसी काम के नही बचे, परिणाम आज दिल्ली में आपके सामने है।
प्रधान सेवक के आवाहन पर देशभर ने घंटे घड़ियाल थाली ठोक कर जिस लाक डाउन से अभिवादन किया गया। परंतु दूसरे शहरों और राज्यों में फंसे लोगों पर किसी की नजर नहीं गई परिणाम स्वरूप फंसे हुए लोगों के पास अब यही विकल्प था कि वह यातायात साधनों के बिना ही अपने अपने घर की ओर निकल पड़े और पुलिस प्रशासन ने उन्हें सीमा बंदी के कारण जाने से रोका इसी बीच अफवाहों का दौर भी बहुत गर्म हो गया नतीजा यह निकला कि अब लोग दिल्ली से सटे सीमा पर एकत्रित हो गए हैं, और अपने घर जाने के लिए वाहनों की तलाश कर रहे हैं उनमें से कई लोगों ने तो पिछले तीन-चार दिनों से भोजन का दाना भी ग्रहण नहीं किया, ऐसी बदहवास स्थिति में जनसेवा को को दिल्ली सरकार को और केंद्र सरकार को ऐसे फंसे हुए लोगों के लिए स्वास्थ्य दवाइयां एवं भोजन का इंतजाम करना चाहिए अन्यथा जिस लाख डॉन को अभी तक हम सफल बता रहे थे वह एक भयानक स्थिति पहुंच जाएगा और देशों में धीरे धीरे मृत लाशों का अंबार खड़ा हो जाएगा। और किसी के ऊपर दोषारोपण करने का समय भी नही बचेगा, ऐसे बुरे वक्त में हम भी अपने सामने से निकलते लोगो की भोजन और जल के माध्यम से मदद कर सकते है।और ईश्वर से प्रार्थना कर सकते है। इतनी विविधता वाले देश मे इतनी जल्दी फैसला लेना कभी कभी सही नही होता।

पलायन के साथ साथ सरकार को वैश्विक स्तर पर कोरोना के फेलते प्रभाव को देखते हुयें अंतरराष्ट्रीय आवागवन पर भी समय रहते रोक लगानी चाहिये थी
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