Friday, November 28, 2025

अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में यज्ञ विज्ञान पर कार्यशाला, 251 कुण्डीय महायज्ञ की वैज्ञानिकता पर हुई चर्चा

जबलपुर। अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम में यज्ञ विज्ञान से जुड़ी वैज्ञानिक अवधारणाओं और स्वास्थ्य लाभों पर विस्तृत पीपीटी प्रेजेंटेशन दिया गया, जिसे कॉलेज के डॉक्टर्स एवं विद्यार्थियों ने विशेष रुचि से सुना।


कार्यशाला में गायत्री परिवार के युवा दीपेश कुमार, DSSV के डॉ. दीपांकर, तथा प्रस्तुति के वक्ता मोहित मिश्रा उपस्थित रहे। यज्ञ के माध्यम से वातावरण-शुद्धिकरण, मानसिक संतुलन, रोग-प्रतिरोधक क्षमता में वृद्धि जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई।

कॉलेज के सभी स्टाफ एवं विद्यार्थियों ने इस ज्ञानवर्धक कार्यशाला की सराहना की। यह आयोजन जबलपुर शक्तिपीठ के कमल राय जी के मार्गदर्शन में निरंतर संचालित हो रहा है।

Wednesday, November 26, 2025

शासकीय अधारताल विद्यालय जबलपुर में यज्ञ विज्ञान पर विशेष व्याख्यान, विद्यार्थियों ने उत्साह से सीखे यज्ञ के रहस्य


शासकीय अधारताल विद्यालय, जबलपुर में गुरुवार को 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के उपलक्ष में “यज्ञ विज्ञान एवं उसके वातावरणीय व स्वास्थ्य संबंधी लाभ” विषय पर एक विशेष व्याख्यान एवं प्रेजेंटेशन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का संचालन विद्यालय प्रबंधन एवं गायत्री परिवार के सहयोग से किया गया।

इस अवसर पर विशेषज्ञ वक्ता द्वारा यज्ञ के वैज्ञानिक पक्ष, पर्यावरण पर इसके सकारात्मक प्रभाव, तथा यज्ञ चिकित्सा के लाभों पर विस्तृत प्रस्तुति दी गई। विद्यार्थियों को बताया गया कि यज्ञ केवल धार्मिक अनुष्ठान नहीं, बल्कि वातावरण शुद्धि, मानसिक संतुलन, तनाव नियंत्रण और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने का महत्वपूर्ण माध्यम भी है।

प्रेजेंटेशन के दौरान यह भी समझाया गया कि यज्ञ में उपयोग होने वाली आहुतियों से वातावरण में ऐंटी-बैक्टीरियल तत्व फैलते हैं, जिससे वायु गुणवत्ता में सुधार होता है। वैज्ञानिक शोधों के उदाहरणों से यह स्पष्ट किया गया कि यज्ञ से वातावरण में मौजूद हानिकारक जीवाणुओं का नाश होता है और मनुष्य के स्वास्थ्य को लाभ मिलता है।

व्याख्यान के पश्चात विद्यार्थियों ने उत्सुकता से प्रश्न पूछे—

यज्ञ का धुआँ शरीर पर कैसे प्रभाव डालता है?

क्या यज्ञ चिकित्सा आधुनिक चिकित्सा की तरह प्रभावशाली हो सकती है?

यज्ञ से मानसिक शांति कैसे मिलती है?


वक्ता के रूप में गायत्री परिवार के कार्यकर्ता मोहित मिश्रा ने सभी प्रश्नों का सरल वैज्ञानिक भाषा में उत्तर देकर विद्यार्थियों का मार्गदर्शन किया। बच्चों ने कार्यक्रम को अत्यंत रोचक, ज्ञानवर्धक और प्रेरक बताया।

विद्यालय प्रबंधन ने इस आयोजन को विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु महत्वपूर्ण कदम बताया तथा आगामी दिनों में भी ऐसे वैज्ञानिक-आधारित आध्यात्मिक कार्यक्रम आयोजित करने की घोषणा की।

इस तरह 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ की तैयारी के क्रम में हुआ यह व्याख्यान न केवल विद्यार्थियों में भारतीय वैदिक संस्कृति के प्रति उत्साह जगाने वाला सिद्ध हुआ, बल्कि विज्ञान और अध्यात्म के समन्वय का एक उत्कृष्ट उदाहरण भी बना।

Thursday, October 30, 2025

“भोपाल में तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर संपन्न, डॉ. चिन्मय पंड्या और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया उद्घाटन”

भोपाल के शारदा विहार आवासीय परिसर में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य युवाओं में आत्मविकास, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का संचार करना था। इसमें मध्य प्रदेश के 55 जिलों से आए सैकड़ों युवा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।शिविर की आधिकारिक घोषणा शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे डॉ. चिन्मय पंड्या द्वारा की गई। उन्होंने इस आयोजन को युवा शक्ति के जागरण का पर्व बताया। उद्घाटन सत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर शिविर का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं के भीतर अपार ऊर्जा और सृजनशीलता छिपी हुई है, जिसे समाज निर्माण में उपयोगी दिशा देने की आवश्यकता है।
तीन दिनों तक चले इस शिविर के दौरान युवाओं के लिए कई प्रेरक और सामूहिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। डिजिटल युग में युवाओं की भूमिका, राष्ट्र सेवा में आधुनिक तकनीक का उपयोग, और सकारात्मक नेतृत्व जैसे विषयों पर चर्चाएँ हुईं। प्रतिभागियों ने समूह चिंतन सत्रों में अपने विचार और सुझाव साझा किए, जिससे संवाद और सहयोग की भावना को बल मिला। गायत्री परिवार के युवा विभाग ने इन चर्चाओं को नई योजनाओं के निर्माण का आधार बताया।शिविर के दूसरे दिन विभिन्न कार्यशालाएँ आयोजित की गईं जिनमें व्यक्तिगत विकास, समय प्रबंधन, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रशिक्षण दिया गया।

 युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति अभियान और डिजिटल सतर्कता जैसे विषयों पर समूह प्रस्तुतियाँ दीं। इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन लाने वाला सृजनकर्ता बन सकता है।

कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है, और यदि यह शक्ति सही दिशा में प्रयुक्त हो तो देश नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। उनके साथ डॉ. पंड्या ने भी मंच से युवाओं को प्रेरित करते हुए राष्ट्र सेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इसी अवसर पर अगले युवा चिंतन शिविर की आधिकारिक घोषणा की गई। डॉ. पंड्या ने आगामी शिविर की मशाल बड़वानी जिले के सेंधवा के गायत्री परिवार के प्रतिनिधियों को सौंपते हुए नए आयोजन स्थल की घोषणा की।समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और मशाल मोमेंटो प्रदान किए गए और उनकी उत्साही भागीदारी की सराहना की गई। पूरे कार्यक्रम का संचालन गायत्री परिवार की युवा शाखा ने किया। इस शिविर ने यह संदेश दिया कि युवा ऊर्जा, जब आदर्शों और सेवा की भावना से जुड़ती है, तो समाज में उल्लेखनीय परिवर्तन ला सकती है।

Friday, October 10, 2025

“नोबेल के नोबल बाबू और ट्रंप ताऊ का अधूरा सपना”


सुना है दुनिया में कई देशों के युद्ध विराम करवाने का श्रेय अपने माथे पर मल-मल कर लगाने वाले स्व-घोषित शांति दूत “ट्रंप ताऊ” इस बार फिर से नोबेल पुरस्कार से चूक गए।
कारण? शायद नोबेल कमेटी ने अभी तक ट्विटर थ्रेड को आधिकारिक शांति संधि स्वीकार नहीं किया।

ट्रंप ताऊ ने तो मध्य पूर्व से लेकर कोरिया तक आधी दुनिया में शांति की घोषणा खुद ही कर दी थी। बस बाकी दुनिया को ही पता नहीं चल पाया।
उन्होंने कहा – “मैंने युद्ध रुकवा दिए थे, बस वो लोग लड़ना मान नहीं रहे थे।”
अब इसमें नोबेल कमेटी का क्या कसूर? वो बंदा तो शांति भी ऐसे करवाता है जैसे मोहल्ले का ताऊ क्रिकेट मैच के बीच में आकर कहे – “बस अब और मत खेलो, मेरी नींद खुल गई है!”

कमेटी ने सोचा होगा –
“भाई, ये आदमी खुद ही खुद को अवॉर्ड दे देगा, तो हम बीच में क्यों पडें? कहीं ऐसा न हो कि नोबेल लेने की बजाय अपने नाम से ही नया अवॉर्ड शुरू कर दे – ‘Trump Peace Prize – Sponsored by Truth Social’।”

कहा तो ये भी जा रहा है कि उन्होंने नोबेल कमेटी को चिट्ठी लिखी –
“अगर इस बार अवॉर्ड नहीं दिया तो मैं शांति नहीं, तूफ़ान फैला दूँगा!”
लेकिन कमेटी भी भारतीय माँ के मूड में थी – “पहले खाना खा, नहीं देंगे!”

खैर, दुनिया को शांति मिले न मिले,
ट्रंप ताऊ को इतना तो मिल ही चुका है —
“देसी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की मानद उपाधि: ‘विश्व शांति का सेल्फी सम्राट।”

नोबेल मिले या न मिले,
ट्रंप ताऊ का सपना अब भी ज़िंदा है — अगले साल फिर से नाम आगे भेज देंगे, इस बार ‘Forwarded Many Times’ लिखकर। ✍️😄

Tuesday, October 7, 2025

🔥 “जूता नहीं, जनभावना चली थी!” — जब न्याय की मूर्ति भी विवादों में लिपटी



कभी कहा जाता था कि न्याय अंधा होता है, पर अब ऐसा लगता है कि न्याय न केवल अंधा है, बल्कि बहरा और गूंगा भी हो गया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष पद पर बैठे न्यायाधीश पर अदालत में जूता चला — पर असल सवाल यह नहीं है कि जूता किसने चलाया, सवाल यह है कि ऐसा माहौल बना क्यों?
कहा जा रहा है कि यह घटना “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की चरम सीमा है, पर सच्चाई यह है कि यह जूता किसी एक वकील का नहीं था, बल्कि करोड़ों नागरिकों की मूक चीख थी — जो वर्षों से फैसलों और फाइलों के बोझ में दबती रही है।

CJI गवई का नाम पिछले कुछ महीनों में लगातार चर्चा में रहा — चाहे वह सनातन धर्म पर दिए गए बयानों को लेकर हो, या फिर उन विवादित फैसलों को लेकर जिन्होंने जनता की आस्था को झकझोरा।
कई बार अदालत ने ऐसे निर्णय दिए जिनमें “भावनाओं” से ज़्यादा “व्याख्याओं” को महत्व मिला।
जनता ने तब भी सहा, मौन रही, लेकिन जब न्याय का पलड़ा आस्था के खिलाफ झुकता दिखा — तब समाज का धैर्य जवाब दे गया।

कभी वही न्यायालय था जो “धर्मनिरपेक्षता” की दुहाई देता था, आज उसी न्यायालय पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
कभी वही न्याय व्यवस्था थी जो “जनता की अदालत” कहलाती थी, अब जनता उससे सवाल पूछने पर “अवमानना” की धमकी झेलती है।

क्या यही लोकतंत्र का चेहरा है?
क्या न्याय अब केवल सत्ता के साथ खड़ा रहेगा और समाज के साथ नहीं?

जिन फैसलों को “ऐतिहासिक” कहा गया, वे जनता के दिलों में “विवादास्पद” बन गए।
कभी आरक्षण से जुड़ा फैसला, कभी धार्मिक संस्थाओं पर टिप्पणी, और कभी ऐसी टिप्पणियाँ जिनसे ऐसा लगा मानो सनातन धर्म ही देश के लिए बोझ हो।

पर याद रखिए, सनातन कोई संस्था नहीं — वह एक संवेदनशील चेतना है, जो हजारों वर्षों से इस भूमि की आत्मा में बसती है।
जब न्याय व्यवस्था उस चेतना से टकराती है, तो जूते नहीं चलते — जनता की चेतना जागती है।

आज वही हुआ।
एक व्यक्ति ने जूता चलाया, लेकिन गूंज पूरे देश में सुनाई दी।
यह गूंज किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं थी, यह व्यवस्था को आईना दिखाने वाली आवाज़ थी।

न्याय की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति “माननीय” हो सकता है, लेकिन वह “अपरिहार्य” नहीं।
जनता की अदालत बड़ी है, और इतिहास गवाह है कि जब जनता उठती है, तो सबसे ऊंचे सिंहासन भी हिल जाते हैं।

इसलिए, यह जूता किसी वकील का हथियार नहीं था —
यह था उस समाज की चुप्पी का अंतिम शब्द,
जो अब बोल पड़ा है —
“न्याय चाहिए, दिखावा नहीं।”


Tuesday, May 6, 2025

भारत का ऑपरेशन सिंदूर पाकिस्तान पर एयर स्ट्राइक से आतंकी और ठिकाने तबाह, पाकिस्तानमे डर का माहौल

भारत ने 7 मई 2025 को "ऑपरेशन सिंदूर" के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान-प्रशासित कश्मीर में नौ स्थानों पर मिसाइल हमले किए।  ये हमले 22 अप्रैल को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले के जवाब में किए गए, जिसमें 27 लोग मारे गए थे, जिनमें 25 हिंदू पर्यटक, एक नेपाली नागरिक और एक स्थानीय मुस्लिम शामिल थे।  

ऑपरेशन सिंदूर: मुख्य बिंदु

लक्ष्य: भारतीय वायुसेना ने लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन जैसे आतंकी संगठनों के ठिकानों को निशाना बनाया।  हमले में राफेल जेट्स से SCALP और AASM हैमर मिसाइलों का उपयोग किया गया।  

समय और स्थान: यह अभियान लगभग 23 मिनट तक चला और बहावलपुर, मुरिदके, कोटली, मुज़फ़्फराबाद, सियालकोट और भिम्बर सहित नौ स्थानों पर हमले किए गए।  

परिणाम: भारत के अनुसार, इन हमलों में 70 से अधिक आतंकवादी मारे गए, जिनमें लश्कर-ए-तैयबा के वरिष्ठ नेता अब्दुल मलिक और मुदस्सिर शामिल हैं।  


पाकिस्तान की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान ने इन हमलों को "युद्ध की कार्रवाई" करार दिया और दावा किया कि भारतीय हमलों में 26 नागरिक मारे गए और 46 घायल हुए।  इसके अलावा, पाकिस्तान ने पांच भारतीय लड़ाकू विमानों को मार गिराने का दावा किया, जिसे भारत ने खारिज कर दिया है।  

अंतरराष्ट्रीय प्रतिक्रिया

संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने दोनों देशों से संयम बरतने की अपील की है।  चीन, अमेरिका और रूस सहित अन्य वैश्विक शक्तियों ने भी स्थिति को शांत करने का आग्रह किया है।  

वर्तमान स्थिति

भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव बढ़ गया है, और दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ कूटनीतिक और सैन्य कदम उठाए हैं।  भारत ने पाकिस्तान के साथ जल समझौते और व्यापारिक संबंधों को निलंबित कर दिया है, जबकि पाकिस्तान ने भारतीय विमानों के लिए अपने हवाई क्षेत्र को बंद कर दिया है।  

स्थिति गंभीर बनी हुई है, और अंतरराष्ट्रीय समुदाय दोनों देशों से तनाव कम करने और वार्ता के माध्यम से समाधान खोजने का आग्रह कर रहा है। 

Thursday, May 1, 2025

भारत में यदि आंतरिक गृह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है तो क्या होगा ?

भारत में यदि आंतरिक गृह युद्ध जैसी स्थिति उत्पन्न होती है (जो वर्तमान में एक कल्पनात्मक और अत्यंत असंभावित परिदृश्य है), तो उससे देश और क्षेत्र की भू-राजनीतिक स्थिति (geopolitical situation) पर गंभीर प्रभाव पड़ सकते हैं। नीचे संभावित परिणामों को श्रेणियों में समझाया गया है:


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1. राष्ट्रीय प्रभाव

राजनीतिक अस्थिरता: केंद्र और राज्य सरकारों का नियंत्रण कमजोर हो जाएगा; संविधानिक ढांचा चरमरा सकता है।

आर्थिक पतन: निवेश बंद हो जाएगा, विदेशी पूंजी और व्यापार भागने लगेंगे; रुपया गिर जाएगा।

सामाजिक विघटन: सांप्रदायिकता, जातिवाद और क्षेत्रीयतावाद चरम पर होगा; मानवीय संकट उत्पन्न होगा।



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2. अंतरराष्ट्रीय प्रभाव

वैश्विक निवेशकों की वापसी: कंपनियाँ और विदेशी संस्थाएं भारत से पलायन करेंगी।

भारत की छवि को नुकसान: "सबसे बड़ा लोकतंत्र" की विश्वसनीयता खत्म हो सकती है।



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3. पड़ोसी देशों की प्रतिक्रिया

चीन और पाकिस्तान की घुसपैठ या हस्तक्षेप: दोनों देश अवसर देखकर सीमाओं पर अतिक्रमण कर सकते हैं या अलगाववादी समूहों को समर्थन दे सकते हैं।

नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका पर प्रभाव: ये देश शरणार्थियों की बाढ़ और अस्थिरता से प्रभावित होंगे।



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4. वैश्विक शक्ति संतुलन में बदलाव

भारत की शक्ति कमजोर होने पर:

चीन एशिया में और मजबूत हो सकता है।

अमेरिका, रूस, यूरोप को भारत के स्थान पर विकल्प तलाशने होंगे।




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5. मानवीय संकट और विदेशी हस्तक्षेप

संयुक्त राष्ट्र शांति सेना की तैनाती संभव हो सकती है।

बड़े पैमाने पर शरणार्थी संकट उत्पन्न हो सकता है।

विदेशी शक्तियाँ (जैसे अमेरिका, चीन) भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर सकती हैं — आर्थिक या सैन्य रूप में।



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यह सब पूरी तरह सिद्धांतात्मक (hypothetical) है, क्योंकि भारत की लोकतांत्रिक, कानूनी और सैन्य संस्थाएं इतनी मजबूत हैं कि गृह युद्ध जैसी स्थिति को रोक सकती हैं।

क्या आप इसे किसी खास परिदृश्य (जैसे जातीय संघर्ष, धार्मिक उथल-पुथल या अलगाववादी आंदोलनों) के आधार पर विस्तार से देखना चाहेंगे?

अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में यज्ञ विज्ञान पर कार्यशाला, 251 कुण्डीय महायज्ञ की वैज्ञानिकता पर हुई चर्चा

जबलपुर। अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम ...