Thursday, October 30, 2025

“भोपाल में तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर संपन्न, डॉ. चिन्मय पंड्या और मुख्यमंत्री मोहन यादव ने किया उद्घाटन”

भोपाल के शारदा विहार आवासीय परिसर में अखिल विश्व गायत्री परिवार के तत्वावधान में तीन दिवसीय युवा चिंतन शिविर का भव्य आयोजन किया गया। इस शिविर का उद्देश्य युवाओं में आत्मविकास, राष्ट्रप्रेम और सामाजिक चेतना का संचार करना था। इसमें मध्य प्रदेश के 55 जिलों से आए सैकड़ों युवा प्रतिभागियों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।शिविर की आधिकारिक घोषणा शांतिकुंज हरिद्वार से पधारे डॉ. चिन्मय पंड्या द्वारा की गई। उन्होंने इस आयोजन को युवा शक्ति के जागरण का पर्व बताया। उद्घाटन सत्र में प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे। दोनों ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलन कर शिविर का शुभारंभ किया। मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि युवाओं के भीतर अपार ऊर्जा और सृजनशीलता छिपी हुई है, जिसे समाज निर्माण में उपयोगी दिशा देने की आवश्यकता है।
तीन दिनों तक चले इस शिविर के दौरान युवाओं के लिए कई प्रेरक और सामूहिक गतिविधियाँ आयोजित की गईं। डिजिटल युग में युवाओं की भूमिका, राष्ट्र सेवा में आधुनिक तकनीक का उपयोग, और सकारात्मक नेतृत्व जैसे विषयों पर चर्चाएँ हुईं। प्रतिभागियों ने समूह चिंतन सत्रों में अपने विचार और सुझाव साझा किए, जिससे संवाद और सहयोग की भावना को बल मिला। गायत्री परिवार के युवा विभाग ने इन चर्चाओं को नई योजनाओं के निर्माण का आधार बताया।शिविर के दूसरे दिन विभिन्न कार्यशालाएँ आयोजित की गईं जिनमें व्यक्तिगत विकास, समय प्रबंधन, आध्यात्मिक दृष्टिकोण और सामूहिक जिम्मेदारी पर प्रशिक्षण दिया गया।

 युवाओं ने पर्यावरण संरक्षण, नशा मुक्ति अभियान और डिजिटल सतर्कता जैसे विषयों पर समूह प्रस्तुतियाँ दीं। इस अवसर पर डॉ. चिन्मय पंड्या ने कहा कि आज का युवा केवल रोजगार प्राप्त करने वाला नहीं, बल्कि समाज में परिवर्तन लाने वाला सृजनकर्ता बन सकता है।

कार्यक्रम के तीसरे और अंतिम दिन पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान विशेष अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि भारत का भविष्य युवाओं के हाथ में है, और यदि यह शक्ति सही दिशा में प्रयुक्त हो तो देश नई ऊंचाइयों को प्राप्त कर सकता है। उनके साथ डॉ. पंड्या ने भी मंच से युवाओं को प्रेरित करते हुए राष्ट्र सेवा को जीवन का अभिन्न हिस्सा बनाने का आह्वान किया। इसी अवसर पर अगले युवा चिंतन शिविर की आधिकारिक घोषणा की गई। डॉ. पंड्या ने आगामी शिविर की मशाल बड़वानी जिले के सेंधवा के गायत्री परिवार के प्रतिनिधियों को सौंपते हुए नए आयोजन स्थल की घोषणा की।समापन समारोह में सभी प्रतिभागियों को प्रमाणपत्र और मशाल मोमेंटो प्रदान किए गए और उनकी उत्साही भागीदारी की सराहना की गई। पूरे कार्यक्रम का संचालन गायत्री परिवार की युवा शाखा ने किया। इस शिविर ने यह संदेश दिया कि युवा ऊर्जा, जब आदर्शों और सेवा की भावना से जुड़ती है, तो समाज में उल्लेखनीय परिवर्तन ला सकती है।

Friday, October 10, 2025

“नोबेल के नोबल बाबू और ट्रंप ताऊ का अधूरा सपना”


सुना है दुनिया में कई देशों के युद्ध विराम करवाने का श्रेय अपने माथे पर मल-मल कर लगाने वाले स्व-घोषित शांति दूत “ट्रंप ताऊ” इस बार फिर से नोबेल पुरस्कार से चूक गए।
कारण? शायद नोबेल कमेटी ने अभी तक ट्विटर थ्रेड को आधिकारिक शांति संधि स्वीकार नहीं किया।

ट्रंप ताऊ ने तो मध्य पूर्व से लेकर कोरिया तक आधी दुनिया में शांति की घोषणा खुद ही कर दी थी। बस बाकी दुनिया को ही पता नहीं चल पाया।
उन्होंने कहा – “मैंने युद्ध रुकवा दिए थे, बस वो लोग लड़ना मान नहीं रहे थे।”
अब इसमें नोबेल कमेटी का क्या कसूर? वो बंदा तो शांति भी ऐसे करवाता है जैसे मोहल्ले का ताऊ क्रिकेट मैच के बीच में आकर कहे – “बस अब और मत खेलो, मेरी नींद खुल गई है!”

कमेटी ने सोचा होगा –
“भाई, ये आदमी खुद ही खुद को अवॉर्ड दे देगा, तो हम बीच में क्यों पडें? कहीं ऐसा न हो कि नोबेल लेने की बजाय अपने नाम से ही नया अवॉर्ड शुरू कर दे – ‘Trump Peace Prize – Sponsored by Truth Social’।”

कहा तो ये भी जा रहा है कि उन्होंने नोबेल कमेटी को चिट्ठी लिखी –
“अगर इस बार अवॉर्ड नहीं दिया तो मैं शांति नहीं, तूफ़ान फैला दूँगा!”
लेकिन कमेटी भी भारतीय माँ के मूड में थी – “पहले खाना खा, नहीं देंगे!”

खैर, दुनिया को शांति मिले न मिले,
ट्रंप ताऊ को इतना तो मिल ही चुका है —
“देसी व्हाट्सएप यूनिवर्सिटी की मानद उपाधि: ‘विश्व शांति का सेल्फी सम्राट।”

नोबेल मिले या न मिले,
ट्रंप ताऊ का सपना अब भी ज़िंदा है — अगले साल फिर से नाम आगे भेज देंगे, इस बार ‘Forwarded Many Times’ लिखकर। ✍️😄

Tuesday, October 7, 2025

🔥 “जूता नहीं, जनभावना चली थी!” — जब न्याय की मूर्ति भी विवादों में लिपटी



कभी कहा जाता था कि न्याय अंधा होता है, पर अब ऐसा लगता है कि न्याय न केवल अंधा है, बल्कि बहरा और गूंगा भी हो गया है। देश के सर्वोच्च न्यायालय के शीर्ष पद पर बैठे न्यायाधीश पर अदालत में जूता चला — पर असल सवाल यह नहीं है कि जूता किसने चलाया, सवाल यह है कि ऐसा माहौल बना क्यों?
कहा जा रहा है कि यह घटना “अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता” की चरम सीमा है, पर सच्चाई यह है कि यह जूता किसी एक वकील का नहीं था, बल्कि करोड़ों नागरिकों की मूक चीख थी — जो वर्षों से फैसलों और फाइलों के बोझ में दबती रही है।

CJI गवई का नाम पिछले कुछ महीनों में लगातार चर्चा में रहा — चाहे वह सनातन धर्म पर दिए गए बयानों को लेकर हो, या फिर उन विवादित फैसलों को लेकर जिन्होंने जनता की आस्था को झकझोरा।
कई बार अदालत ने ऐसे निर्णय दिए जिनमें “भावनाओं” से ज़्यादा “व्याख्याओं” को महत्व मिला।
जनता ने तब भी सहा, मौन रही, लेकिन जब न्याय का पलड़ा आस्था के खिलाफ झुकता दिखा — तब समाज का धैर्य जवाब दे गया।

कभी वही न्यायालय था जो “धर्मनिरपेक्षता” की दुहाई देता था, आज उसी न्यायालय पर पक्षपात के आरोप लग रहे हैं।
कभी वही न्याय व्यवस्था थी जो “जनता की अदालत” कहलाती थी, अब जनता उससे सवाल पूछने पर “अवमानना” की धमकी झेलती है।

क्या यही लोकतंत्र का चेहरा है?
क्या न्याय अब केवल सत्ता के साथ खड़ा रहेगा और समाज के साथ नहीं?

जिन फैसलों को “ऐतिहासिक” कहा गया, वे जनता के दिलों में “विवादास्पद” बन गए।
कभी आरक्षण से जुड़ा फैसला, कभी धार्मिक संस्थाओं पर टिप्पणी, और कभी ऐसी टिप्पणियाँ जिनसे ऐसा लगा मानो सनातन धर्म ही देश के लिए बोझ हो।

पर याद रखिए, सनातन कोई संस्था नहीं — वह एक संवेदनशील चेतना है, जो हजारों वर्षों से इस भूमि की आत्मा में बसती है।
जब न्याय व्यवस्था उस चेतना से टकराती है, तो जूते नहीं चलते — जनता की चेतना जागती है।

आज वही हुआ।
एक व्यक्ति ने जूता चलाया, लेकिन गूंज पूरे देश में सुनाई दी।
यह गूंज किसी व्यक्ति के खिलाफ नहीं थी, यह व्यवस्था को आईना दिखाने वाली आवाज़ थी।

न्याय की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति “माननीय” हो सकता है, लेकिन वह “अपरिहार्य” नहीं।
जनता की अदालत बड़ी है, और इतिहास गवाह है कि जब जनता उठती है, तो सबसे ऊंचे सिंहासन भी हिल जाते हैं।

इसलिए, यह जूता किसी वकील का हथियार नहीं था —
यह था उस समाज की चुप्पी का अंतिम शब्द,
जो अब बोल पड़ा है —
“न्याय चाहिए, दिखावा नहीं।”


अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में यज्ञ विज्ञान पर कार्यशाला, 251 कुण्डीय महायज्ञ की वैज्ञानिकता पर हुई चर्चा

जबलपुर। अनुश्री होम्योपैथी कॉलेज में 251 कुण्डीय गायत्री महायज्ञ के वैज्ञानिक पहलुओं पर केंद्रित एक विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यक्रम ...